एक दिन कागज और पेंसिल के साथ

सीखा कि स्केचिंग कैसे करें

आज शाम को मैंने एक किताब “हाउ लॉन्ग इज ए पीस ऑफ़ स्ट्रिंग?” पढ़ना शुरू किया, जिसके लेखक रॉब ईस्टवे हैं। अगर आपके पास कुछ घंटे हैं तो यह किताब पढ़ना काफी रोचक होगा। लेकिन इससे पहले कि मैं पुरे ध्यान से किताब पढ़ पाता, कुछ विचार मेरे मन में दौड़ रहे थे कि मैं स्केचिंग करना कैसे सीखू। बहुत दिनों से मैं यह तकनीकी सिखना चाहता था क्यों की जो भी मैं कल्पना करता हूँ उसे कागज पर खिंच पाऊं।

जब आप बहुत अच्छा संवाद या विचारों को प्रकट करना चाहते हैं तो यह जितना ज्यादा वास्तविक हो उतना ही अच्छा होता है। उदहारण के लिए, यदि आप किसी को ये याद दिलाना चाहते हैं की अंतिम बार आपने कौन सा गाना सुना तो उसे गाने की लिखावट समझाने की बजाय आप उसे ठीक उसी तरह से गा कर सुना दें तो यह ज्यादा वास्तविक होगा। और यह सामने वाले व्यक्ति को भी ज्यादा आसानी से समझ में आएगा। यह बहुत ही साधारण उदहारण है, लेकिन यह और जटिल तब हो जाता है जब आप कुछ कल्पना कर रहे हो और उसे शब्दों में समझाना कठिन हो। इस परिस्थिति में सुनने वाला कुछ अलग भी समझ सकता है। परन्तु यदि आप उसे चित्र के माध्यम से समझाए तो शायद यह आसान होगा।

आइये देखते हैं कि कैसे कुछ घंटों में मैंने स्केचिंग करना सीखा और कुछ स्केच जो कि सीखते समय बनाया।

मुझे कुछ स्केच बनाने की बहुत जिज्ञासा थी। मैंने यूट्यूब पर एक ट्यूटोरियल देखना शुरू किया जिसमे शिक्षक साधारण वस्तु को खींचना बता रहा था। वहां कुछ संकेत और प्रतिरुप को ध्यान देना बहुत ही जरुरी था, क्यों की मैंने अभी सीखना शुरू ही किया था। निचे जो स्केचिंग है वो मेरी पहली कला थी जिसे मैंने वीडियो देखते हुए बनाया। इसमें आप देख सकते हैं की एक गोला है जिसकी छाया समतल पर गिर रही है।

पहली कला

इस ट्यूटोरियल से एक बात साफ़ थी कि मुझे मेरे पेंसिल पे मेरा नियंत्रण होना बहुत ही जरुरी था। इसे एक थोड़ा भी इधर-उधर नहीं होना था। किसी भी चित्र को देख कर बनाते हुए भी यह जरुरी है की बिन्दुओ के बिच की दुरी का अनुमान सही ढंग से उतारा जाये, अन्यथा थोड़ी भी गलती इसे गलत बना सकती है। हालाँकि जब आपने सीखना शुरू ही किया है तब गलतियों की वजह से परेशान होने की जरुरत नहीं है, कई बार प्रयास करने से आप इसमें सुधार करने लगेंगे।

ट्यूटोरियल के अंत में कुछ अच्छे सुझाव दिए गए हैं, जैसे कि आस-पास की वस्तुओं को ध्यान से देखना और उसे कागज पर उतारने की कोशिश करें। लगातार प्रयास से कल्पना करना और स्केचिंग करने की मानसिकता विकसीत होने लगती है और फिर आपको अपने विचारों को दर्शाने में आसानी होगी।

अभी भी मुझे ठीक तरह से सब कुछ नहीं आ रहा था। फिर से मैंने दूसरा ट्यूटोरियल देखना शुरू किया जिसमें आँख को वास्तविक तरीके से बनाना बताया गया था। जब मैं यह ट्यूटोरियल देख रहा था तभी मैंने निचे संलग्न स्केच को बनाया-

आँख

अब मुझे थोड़ा विश्वास था कि मैं स्केच बना सकता हूँ। इसलिए अब मैंने अपने मोबाइल से एक चित्र का चयन किया और उसे बनाना शुरू किया।

Original Image

स्केच बनाने के बाद का परिणाम निचे देखिये।

Final sketch

यह परफेक्ट स्केच नहीं था जैसा कि आप साफ़ देख सकते हैं, बहुत साड़ी चीजे हैं जिनका सुधार किया जा सकता है। लेकिन यह काफी मनोरंजक था, मुझे आशा है कि आगे चलकर मैं कुछ ऐसा भी बनाऊंगा जो ज्यादा वास्तविक लगे :)

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मैं प्रौद्योगिकी के बारे में यहां लिखने से ज्यादा ट्वीट करता हूं 😀

Ritesh Shrivastav