आतंरिक अहसास

सहज-ज्ञान पर विचार

नेशनल साइंस फाउंडेशन के अनुसार, एक औसत व्यक्ति के पास प्रति दिन लगभग 12,000 से 60,000 विचार होते हैं। उन हजारों विचारों में से, 80% नकारात्मक थे, और 95% पहले दिन की तरह ही दोहराए जाने वाले विचार थे। यदि यह विकल्पों या निर्णयों के बारे में आता है, तो यह अनुमान लगाया जाता है कि औसत वयस्क प्रत्येक दिन लगभग 35,000 दूरस्थ सचेत निर्णय लेता है।

छवि क्रेडिट: 888casino.com

निर्णय लेने की रणनीति

उपरोक्त संख्याओं को देखें, क्या आपको लगता है कि आपने कभी अपने दैनिक जीवन में इन्हें देखा है? जाने-अनजाने में हम बहुत सारे फैसले ले लेते हैं। इस लेख के अनुसार, हम निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों का उपयोग करते हैं।

  1. लालसा — दिए गए पहले विकल्प का लाभ उठाना
  2. अवलोकन — सबसे प्रसन्न, आरामदायक और लोकप्रिय विकल्प को चुनना क्योंकि यह विकल्प ज्यादातर अंतर्घटित लगता है
  3. नियुक्त करना — खुद निर्णय नहीं लेना और दूसरे भरोसेमन्द लोगों से निर्णय लिवाना
  4. टालमटोल/विक्षेपण — निर्णय के प्रभाव से बचने के लिए उसे अनदेखा करना या टालना
  5. संतुलन — इसमें शामिल कारकों का तोलमोल, अध्ययन करना और फिर समय और ईकठ्ठित जानकारी को ध्यान में रखते हुए सबसे अच्छा निर्णय लेना
  6. प्राथमिकता देना और चिंतन करना — उन निर्णयों में सबसे अधिक ऊर्जा, विचार और प्रयास करना, जो सबसे अधिक प्रभाव डालते हों

हम कुछ निर्णय क्यों लेते हैं, इस पर तर्क

यदि कोई भी(या आप खुद) ये जानना चाहता हो कि आपने कोई निर्णय क्यों लिया और आपको ये लगता है कि आपको कुछ भी नहीं पता कि ये निर्णय क्यों लिया। तब भी जब आप खुद निर्णायक हैं। वास्तविकता यह है कि आपने अपने सहज-ज्ञान पर निर्भर हो कर यह निर्णय लिया, लेकिन आपको यह समझ नहीं आता है कि उसे कैसे समझाएं। क्या ऐसी परिस्थिति में होना आश्चर्यजनक नहीं है? ऐसा क्यों होता है, आप क्या भूल जाते हैं? क्या आपको लगता है की आपने निर्णय बिना किसी कारण ही लिया?

कोई भी निर्णय जो हम लेते हैं, हमेशा ये हमारे अनुभव के कारण होते हैं। ज्यादातर समय अनुभव हमें याद नहीं रहते लेकिन अनजाने में ही सही, लेकिन उनके परिणाम अंदर ही अंदर हमे महसूस होते हैं। अनुभव होने के बावजूद भी जब हम निर्णय लेते हैं तो कारण बताने में हम असमर्थ होते हैं क्यों कि हमारे पास उन अनुभव को याद करने का समय बहुत कम होता है। कोई भी विचार बिना किसी अनुभव के नहीं आ सकता, यदि आपको ऐसा लगता है कि कुछ विचार बिना अनुभव के आ रहे हैं तो यह मात्र एक कल्पना है। सो कर उठने से ले कर, तत्पर होना, आलसी होना ये सब अनुभव के ऊपर ही निर्भर करता है। और जब आप कोई भी निर्णय लगातार लेते हैं तो आगे चलकर यही हमारे आदत में परिवर्तित हो जाता है। और फिर भविष्य के ज्यादातर निर्णय हमारी आदतों के ऊपर निर्भर करने लगते हैं।

अच्छे निर्णय लेना

जितने अच्छे निर्णय हम लेंगे, हमारा जीवन उतना ही सरल होगा। अगर हम क्यों पर ज्यादा ध्यान दें तो हमारे निर्णय ज्यादातर सही साबित होंगे। जब भी आप निर्णय लेते हैं, अपने आप का निरीच्छण खुद करें, खुद से प्रश्न करें। आप अंततः कारणों को जानने लगेंगे। और जितना ज्यादा आप खुद को जानेंगे, उतना ही सही निर्णय आप लेंगे और उतना ही अच्छे से आप ये समझा पाएंगे कि आपने निर्णय क्यों लिया। सहज-ज्ञान पर आधारित कुछ तथ्य इस प्रकार हैं-

  • आपका सहज-ज्ञान आपके अनुभव और आपके ज्ञान से जो कि अनुभव से प्राप्त हुए हैं से परिवर्तित होता है
  • आपका सहज-ज्ञान आपके दिमाग में तथ्य और एहसास के जंजाल की तरह एन्कोडेड होता है
  • आपका सहज-ज्ञान आपको आपके शरीर की सभी तंत्रिका कोशिकाओं से जोड़ता है
Published
Like it? Tweet.

मुझे ट्विटर पर फॉलो करें

मैं प्रौद्योगिकी के बारे में यहां लिखने से ज्यादा ट्वीट करता हूं 😀

Ritesh Shrivastav