ओ.के.आर. को लागू करना

ओ.के.आर. पर विचार और आरंभ कैसे करें

क्या आप सोच रहे हैं कि आपके कार्य के समूह जो कि आपके माइलस्टोन में जुड़े हैं, उसके साथ कैसे आप अपने संगठन को सफल करने में मदद करेंगे? और साथ ही साथ आप कैसे आगे बढ़ेंगे? आप इस स्थिति में कई कारणों से हो सकते हैं लेकिन सबसे प्रमुख कारण अक्सर लक्ष्य को सही से निर्धारित नहीं किया होना होता है। जब आप व्यक्तिगत रूप से या टीम के साथ बढ़ना चाहते हैं, तो ध्यान केंद्रित करने और अच्छी तरह से निर्देशित पथ के लिए आपको पता होना चाहिए कि आपके लक्ष्य क्या हैं। यह टीम और व्यग्तिगत रूप से निर्णय लेने में मदद करता है, क्यों कि सभी लोग लक्ष्य को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं।

मैं अभी जॉन डोएर की लिखी एक पुस्तक “मेजर व्हाट मैटर्स” पढ़ रहा था, इस पुस्तक के शीर्षक का शाब्दिक अर्थ है “उपयोगी परिणाम को तौलें”। यह एक ऐसी पुस्तक है जिसे आपको अवश्य पढ़ना चाहिए अगर आप ओ.के.आर. के उदहारण को और उसे प्रयोग में लाने की विधि को समझना चाहते हैं। इस लेख में हम संवाद करेंगे कि ओ.के.आर. क्या है और इसका प्रयोग कैसे शुरू करें। यह लेख उन लोगो के लिए भी है जो अपने संगठन में लक्ष्य को निर्धारित करना चाहते हैं और ओ.के.आर. को और ज्यादा जानना चाहते हैं।

ओ.के.आर.(ओब्जेक्टिव्स एंड की रिजल्ट्स) मुख्यतः मापनयोग्य उद्देश्यों और उसे पूरा करने के लिए कार्यों का संक्षिप्त विवरण होता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “उद्देश्य और प्रमुख परिणाम”। एक झलक में इसे समझने के लिए, निचे सलंग्न प्रवाह को ध्यान से देखें, इस प्रवाह में ओ.के.आर. को व्यवस्थित करने के स्टेप्स लिखे हैं जिसके ऊपर हम आगे संवाद करेंगे। यहाँ हम ये मानते हैं कि संगठन में लक्ष्य पहले से निर्धारित है, यदि ऐसा नहीं है तो आपको पहले अपने संगठन के लक्ष्य को निर्धारित करना चाहिए।

प्रवाह - ओ.के.आर.

आइये इन बिंदुओं पर संवाद करें।

1. व्यक्तिगत लक्ष्य

यह पहला चरण है, जहाँ सभी टीम के सदस्य अपने लक्ष्य से एक दूसरे को अवगत कराएँगे। यह जरुरी नहीं है कि सभी संगठनों में लक्ष्य निर्धारित करने का क्रम एक जैसा हो। उदाहरण के लिए, किसी संगठन में यह क्रम ऊपर के सदस्यों से शुरू हो सकता है और किसी संगठन में छोटी टीम अपना लक्ष्य पहले निर्धारित करती है। लेकिन यदि क्रम को ध्यान में न रखा जाये तो सभी सदस्य ज्यादा उत्पादक महसूस करेंगे। और जब भी हम लक्ष्य के बारे में बात करते हैं, हमेशा हम “क्या” पर ध्यान देते हैं, जैसे मैं क्या पाना चाहता हूँ। लक्ष्य टीम में एक दूसरे को साथ लाते हैं, संरेखित करते हैं और अंत में सभी सदस्य अपने कार्य से संतुष्ट महसूस करते हैं।

यहाँ आपको ध्यान रखना चाहिए कि जो भी लक्ष्य आपने निर्धारित किये हैं वो आपके व्यग्तिगत लक्ष्य से मिलते हों। इसके पीछे कारण यह है कि, जब भी संगठन के लक्ष्य आपके व्यग्तिगत लक्ष्य से मेल खाएंगे तो सभी सदस्य भी संगठन के साथ-साथ ही विकास करेंगे और यही वह समय होगा जब वे सभी अपने काम को करते हुए बहुत संतुष्ट और खुश रहेंगे।

अब आप अगर ऊपर संलग्न प्रवाह चित्र को ध्यान से देखेंगे तो लक्ष्य निर्धारित करते समय कुछ और बिंदु भी लिखे हैं जो कि लक्ष्य निर्धारित करने में आपकी मदद करते हैं। आइये एक-एक कर सभी बिंदुओं पर चर्चा करें।

1.1. छह महीने के लिए लक्ष्य करें

अगर आपने अपने लक्ष्य को हांसिल करने के लिए कोई समयसीमा नहीं निर्धारित किया है तो उसे हांसिल करना कठिन होता है क्यों कि आप उसे हमेशा आगे बढ़ाते रहेंगे। शुरुवात करने के लिए कम समयसीमा निर्धारित करना सही होता है क्यों कि आप कम समय में यह अनुमान लगा सकते हैं कि जो भी आपने कार्यप्रवाह के लिए निर्धारित किया था वह सही दिशा में जा रहा है या नहीं। पहली बार ओ.के.आर. के प्रयोग के लिए मैं इसे 6 महीने के लिए निर्धारित करूँगा और अगर मैं ज्यादा निश्चित हूँ तो इसे एक साल के लिए भी कर सकता हूँ। ठीक उसी तरह अगर मैं लक्ष्य को लेकर ज्यादा निश्चित नहीं हूँ तो इसे 3 महीने के लिए भी कर सकता हूँ। इस लेख में मैं 6 महीने की अवधि को प्रयोग में लाऊंगा और आप इसे अपने अनुकूल परिवर्तित भी कर सकते हैं।

1.2. अधिकतम पांच गोल

बहुत अधिक लक्ष्य रखना भी सही नहीं होता है, क्यों कि आप फिर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे। इसलिए पांच लक्ष्य भी कहीं अधिक होगा। टीम की संख्या के आधार पर लक्ष्यों को आप निर्धारित कर सकते हैं, यदि आपके पास कम सदस्य हैं तो लक्ष्यों को भी कम करना होगा। किसी भी निर्णय को लेते समय यह ध्यान जरूर रखिये की आपकी योजना लक्ष्य को हांसिल करना है, इसलिए संख्या के ऊपर निर्भर होकर यह निर्णय मत लीजिये कि लक्ष्य ज्यादा कठिन है या नहीं। और जब आप एक साथ सभी व्यक्तिगत लक्ष्यों को देखेंगे तब आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि संगठन के सारे लक्ष्य को पूरा किया जा रहा है।

1.3. टीम के पूरक बनें

टीम के सभी सदस्यों का दायित्व है कि वो एक दूसरे के पूरक बनें और संगठन के लक्ष्य को हमेशा ध्यान रखें।

1.4. पुनर्विचार

व्यक्तिगत लक्ष्यों को बार बार सोचें, चर्चा करें क्यों कि एक बार आपने अपने लक्ष्यों को सुनिश्चित कर दिया तो इसमें बदलाव करना कहीं से भी सही नहीं रहेगा। एक बार जब आपने लक्ष्य को निर्धारित कर दिया तो आने वाले 6 महीने में आप इसे नहीं बदलेंगे, अगर आपको लक्ष्य को बदलना पड़ता है तो ये इशारा करता है कि शुरुवात में आपने लक्ष्यों का निर्धारण करते समय ज्यादा नहीं सोचा।

2. सुनिश्चित करें की संघर्ष की कोई गुंजाइश न हो

यह ओ.के.आर. प्रक्रिया जिसके बारे में हम संवाद कर रहे हैं, यह सॉफ्टवेयर को बनाने और उसके प्रबंधन के लिए उपयोग में लाने के लिए है। और यहाँ सभी सदस्य एक ही सामान लक्ष्य को हांसिल करने के लिए प्रयास कर रहे होंगे, इसलिए यहाँ ऐसी परिस्थिति पैदा हो सकती है जिसमे लोगों की सोच न मिले। इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यक्तिगत लक्ष्य सही से निर्धारित हैं, और यह जाँच करने के लिए निम्नलिखित प्रश्नो को पूछें-

  1. क्या निर्धारित लक्ष्यों में आपको कोई मतभेद दिखाई दे रहा है, उदहारण के लिए क्या एक ही लक्ष्य दो लोगों की सूची में शामिल है? यदि ऐसा है तो इसका निवारण करिये। आदर्श स्थिति में, एक प्रकार का लक्ष्य केवल एक ही सदस्य द्वारा निर्धारित होना चाहिए, यह जवाबदेही और निचले स्तर के मतभेद के निवारण को सुलझाने में मदद करेगा।
  2. क्या उपलक्ष्यों को भी शामिल किया गया है? इसका समाधान आप पैतृक लक्ष्य को हटा के कर सकते हैं, क्यों कि जब तक आप उपलक्ष्यों को पूरा न कर लें, आप पैतृक लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकते। और यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो पैतृक लक्ष्य और उपलक्ष्यों को सम्मिलित कर लीजिये।

3. संरेखित उद्देश्य - मापने योग्य उद्देश्य

लक्ष्य सामान्य हो सकते हैं, आपको लक्ष्यों पर मापदंड की बाधा नहीं लगाना चाहिए क्यों कि जब भी आप ऐसा करेंगे आप अपने महत्वाकांक्षी होने की संभावना को नष्ट कर देंगे। पिछले चरण में हमने लक्ष्यों को कैसे निर्धारित करें इस पर विचार किया, अब समय है कि उन लक्ष्यों को मापने योग्य उद्देश्यों में परिवर्तित करें। उद्देश्यों को निर्धारित करते समय भी हम उसी तरह से प्रयास करेंगे जैसा कि लक्ष्यों को निर्धारित करते समय किया था, परन्तु इसमें हम मापदंड की विवशता को जोड़ेंगे।

3.1. मापन योग्यता

उद्देश्य मापने योग्य होना चाहिए क्यों कि ओ.के.आर. प्रक्रिया के अंतिम चरण में इसी के जरिये हम यह जानने की कोशिश करेंगे की हमने अपने लक्ष्य को कितना हांसिल किया है और अभी क्या शेष है। मापने के लिए आपको उद्द्येश्यों को संख्याओं से जोड़ना होगा, उदहारण के लिए उपयोगकर्ता के शिकायत की संख्या को 50% से कम करना। आपका उद्देश्य यह नहीं हो सकता कि आप शिकायतों को कम करना चाहते हैं, अगर संख्या नहीं रहेगी तो आप माप नहीं कर पाएंगे कि आपने लक्ष्य को हांसिल किया या आप उससे दूर गए।

3.2. संरेखित उद्देश्य

व्यक्तिगत उद्देश्य को संगठन के लक्ष्य और व्यक्तिगत लक्ष्य से रेखांकित होना चाहिए। व्यक्तिगत उद्देश्य और संगठन के लक्ष्य में मतभेद नहीं होना चाहिए।

4. मापने योग्य मुख्य परिणाम

प्रत्येक उद्देश्य जिसे हमने निर्धारित किया है, उसे पूरा करने के लिए हमें एक और सूची तैयार करनी होगी जिसमे हम “कैसे” पर ध्यान देंगे और इसे हम “प्रमुख परिणाम” की संज्ञा देंगे। अगर हम पिछले उदाहरण को देखें तो हमारा उद्देश्य उपयोगकर्ता के शिकायत की संख्या को 50% से कम करने का है और इसके लिए आपको कुछ बदलाव करने होंगे या कुछ सुधार करने होंगे। और जो भी बदलाव या सुधार के प्रयास होंगे उसे आप सुनिश्चित करेंगे, और अंत में आपके पास इस उद्देश्य को पूरा करने वाले कार्यों की सूची होगी। इस तरह की सूची के कार्यों को आप बदल भी सकते हैं लेकिन आपका प्रमुख लक्ष्य है की आप अपने निर्धारित उद्देश्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा कर लें। ओ.के.आर. मुख्यतः मापनयोग्य उद्देश्यों और उसे पूरा करने के लिए कार्यों का संक्षिप्त विवरण होता है। जब आप अपने लक्ष्यों को पूरा करेंगे तो इन्ही सूचीबद्ध बिंदुओं पर गौर करेंगे। टीम का कोई भी सदस्य आपकी सूची को देख कर ये समझ सकता है की अभी तक कितना काम हो चुका है। कभी आपको लग सकता है कि कुछ कार्य जल्दी हो जायेंगे या कुछ कार्यों को करने में प्रारम्भिक अनुमान से ज्यादा समय लगेगा, तब अपने कार्यसूची को आप इस तरह से संतुलित करेंगे जिससे कि आपका उद्देश्य निश्चित समयाविधि में पूरा हो। यहाँ कुछ भी निर्धारित करने का एक ही आधार है कि, उद्देश्य निरंतर होंगे और कार्य सूची परिवर्तनशील होगीं।

5. क्रियान्वयन

आपके संगठन में लागू किये जाने वाले नियम के ऊपर क्रियान्वयन प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। ओ.के.आर. टीम के डेवलपमेंट प्रक्रिया को किसी भी तरह से नहीं बदलता है। लेकिन व्यक्तिगत लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए ओ.के.आर. की सहायता से आपकी टीम एक अच्छी स्थिति में हो सकती है, क्यों कि इसको बनाते समय व्यक्तिगत इच्छाओं को ध्यान में रखा जाता है। इसके आलावा जब भी आप टीम के लिए स्प्रिंट योजना बनाएंगे तो आपका ध्यान हमेशा संगठन के लक्ष्य पर होगा, और आपके दिशाविहीन होने की संभावना बेहद कम होगी। जो भी कार्य लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता नहीं करेंगे उन्हें आप बैकलॉग में डाल देंगे और यह टीम को एक ही लक्ष्य की तरफ बढ़ने के लिए केंद्रित करेगा।

6. सत्यापन और दोहराना

ओ.के.आर. के योजना के अनुसार अंतिम चरण में आप थोड़े समय के लिए यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या योजना के अनुरूप नहीं गया और क्या सुधार किया जा सकता है। और इसके एक पुरे चक्र पुरे होने पर आपको सुधार करने के लिए बहुत सी प्रक्रिया दिखाई दे सकती है, और यह एक अच्छी बात है। और जब आप अगले चक्र के लिए योजना बनाएंगे तो इन सीख का ध्यान रखेंगे कि ये गलतियां न दुहराई जाएँ।


इस लेख के लिए बस इतना ही, अगर आपके पास इस विषय पर कोई सुझाव है तो कृपया उसे कमेंट में लिखें :)

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Ritesh Shrivastav