सामान्यता

सामान्यता पर विचार

सामान्य या असामान्य होने का क्या मतलब है? क्या हम अक्सर एक ही बात पर विचारों में बदलाव का निरीक्षण करते हैं? हम कैसे तय करें कि कुछ सामान्य है या नहीं?

रोजमर्रा, हम ऐसे अनुभव से गुजर रहे हैं जो कि एक बार की असामान्य घटना को सामान्य बना दे रहा है। दैनिक आधार पर, हमे ऐसी घटनाएं देखने को मिलजाती हैं जो की सामान्य नहीं होती हैं। लेकिन उन घटनाओ के आधार पर हम जाने अनजाने में अंदर ही अंदर एक अलग ही तरह से विश्व को देखने लगते हैं।

असामान्य परिस्थितयों पर हमारी जो प्रतिक्रिया होती थी, जो कि अब सामान्य होती है, उसे बदलना होगा। यदि हम अलग स्थिति में एक जैसी ही प्रतिक्रिया दोबारा दें तो ये प्रतिक्रियाविहीन हो जायेगा। और आगे चलकर हम इस तरह की चीजों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे जिसपर रोक या प्रतिक्रिया होनी चाहिए थी। इसलिए,

  • प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए नाराजगी को अधिक स्पष्ट और खुले तौर पर व्यक्त करना होगा
  • सांत्वना देने के लिए प्रतिक्रिया को अधिक नाटकीय और अधिक क्रूर होना होगा
  • और सांत्वना को खुद के अंदर समा जाने की जगह, सार्वजनिक रूप से और सभी के लिए व्यक्त करना होगा

अब कुछ भी सामान्य नहीं है। और इसलिए हमारी प्रतिक्रियाएँ हमारे खुद को आश्चर्यचकित करती हैं!

Published
Like it? Tweet.

मुझे ट्विटर पर फॉलो करें

मैं प्रौद्योगिकी के बारे में यहां लिखने से ज्यादा ट्वीट करता हूं 😀

Ritesh Shrivastav