जागना

जागने पर विचार

हमारा दिन कैसा होगा ये हमारे जागने पर निर्भर करता है, यदि हम दिन में बहुत कुछ कर लेते हैं तो हम सोचते हैं की दिन अच्छा था।

सामान्यता कैसे हम अपने दिन की शुरुवात करते हैं, इसके आधार पर जागने की आदत को चार तरह में विभाजित कर सकते हैं। और आगे चलकर यही अच्छे, बुरे या सामान्य दिन होने में योगदान करता है। हममें से कौन नहीं ये चाहेगा की उसका दिन अच्छा हो? आइये इन चार अलग प्रकारो पर गौर करें-

1. सोनेवाला

पहला प्रकार उस तरह के मनुष्यों का है जो जागने के लिए आवाजों का प्रबंध करते हैं लेकिन किसी तरह के शोर का उनपर कोई असर नहीं होता है। आसपास के सभी लोग व्यथित हो जायेंगे लेकिन ये नहीं। इसलिए इस प्रकार की आदतों वाले लोगों को एक समूह में रख सकते हैं, और इन्हे सोनेवाला संज्ञा देते हैं।

2. झपकी लेने वाला

अगला प्रकार उस तरह के मनुष्यों का है जो कि जागने के लिए आवाजों का प्रबंध करते हैं लेकिन जब उन्हें आवाज सुनाई देती है तब उसे भविष्य के लिए टाल देते हैं। और यह प्रक्रिया काफी समय तक चलती रहती है। ज्यादातर मनुष्य इस तरह के प्रकार में आते हैं।

3. ढलने वाला

अगला प्रकार उस तरह के मनुष्यों का है जो जागने के लिए आवाजों का प्रबंध करते हैं लेकिन जब उन्हें आवाजें सुनाई देती है तो उसे बंद कर देते हैं ताकि पुनः आवाज व्यवधान न पहुंचाए।

4. जागने वाला

अगला प्रकार उस तरह के मनुष्यों का है जो बहुत तत्पर रहते हैं। ये जागने के लिए सांकेतिक प्रबंध करते हैं। कभी-कभी तो इन्हे किसी भी प्रबंध की आवश्यकता नहीं होती।जैसे ही जागने का समय होता है, इन्हे अनुभव हो जाता है। और इनमे दिन को अच्छा बना देने की क्षमता होती है।

यहाँ पर मैंने सभी प्रकारो को मनुष्यो के तत्परता के आधार पर विभाजित किया है, जहाँ पर तत्परता को उनके बौद्धिक और तार्किक से परिवर्तित किया जा सकता है।

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मैं प्रौद्योगिकी के बारे में यहां लिखने से ज्यादा ट्वीट करता हूं 😀

Ritesh Shrivastav